| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 5: सुन्दर काण्ड » सर्ग 45: मन्त्री के सात पुत्रों का वध » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 5.45.1  | ततस्ते राक्षसेन्द्रेण चोदिता मन्त्रिण: सुता:।
निर्ययुर्भवनात् तस्मात् सप्त सप्तार्चिवर्चस:॥ १॥ | | | | | | अनुवाद | | राक्षसराज रावण की आज्ञा पाकर मंत्री के सातों पुत्र अग्नि के समान तेजस्वी होकर महल से बाहर निकल आए॥1॥ | | | | At the command of Ravana, the king of demons, the minister's seven sons, all as radiant as fire, came out of the palace.॥ 1॥ | | ✨ ai-generated | | |
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