श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 44: हनुमान जी के द्वारा चैत्यप्रासाद का विध्वंस तथा उसके रक्षकों का वध  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.44.14 
सालं चतुर्भिश्चिच्छेद वानरं पञ्चभिर्भुजे।
उरस्येकेन बाणेन दशभिस्तु स्तनान्तरे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
चार बाणों से उसने साल वृक्ष को काट डाला, पाँच बाणों से हनुमान की भुजाएँ घायल कर दीं, एक बाण से उसकी छाती घायल कर दी और दस बाणों से उसके स्तनों के मध्य भाग को घायल कर दिया॥14॥
 
With four arrows he cut down the sal tree, with five arrows he injured Hanuman's arms, with one arrow he injured his chest and with ten arrows he injured the middle part of his breasts.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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