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ramayan 5.43.6: उस तेजस्वी पवनपुत्र ने विशाल शरीर धारण करके लंका को गुंजा दिया और दुस्साहसपूर्वक उस महल को नष्ट करना आरम्भ कर दिया।   |   ramayan सर्ग 5.43: हनुमान जी के द्वारा चैत्यप्रासाद का विध्वंस तथा उसके रक्षकों का वध   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 43: हनुमान जी के द्वारा चैत्यप्रासाद का विध्वंस तथा उसके रक्षकों का वध  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.43.6 
स भूत्वा सुमहाकाय: प्रभावान् मारुतात्मज:।
धृष्टमास्फोटयामास लङ्कां शब्देन पूरयन्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
उस तेजस्वी पवनपुत्र ने विशाल शरीर धारण करके लंका को गुंजा दिया और दुस्साहसपूर्वक उस महल को नष्ट करना आरम्भ कर दिया।
 
That illustrious son of the wind, assuming a huge body, made Lanka resonate and audaciously began to destroy that palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)