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ramayan 5.43.19-20h: महल को जलता हुआ देखकर वानरों के समान हनुमान्‌जी ने उसी खंभे से सैकड़ों राक्षसों को मार डाला, जैसे इन्द्र अपने वज्र से राक्षसों का संहार करते हैं और आकाश में खड़े होकर उस तेजस्वी योद्धा ने इस प्रकार कहा - ॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.43: हनुमान जी के द्वारा चैत्यप्रासाद का विध्वंस तथा उसके रक्षकों का वध   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 43: हनुमान जी के द्वारा चैत्यप्रासाद का विध्वंस तथा उसके रक्षकों का वध  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  5.43.19-20h 
दह्यमानं ततो दृष्ट्वा प्रासादं हरियूथप:।
स राक्षसशतं हत्वा वज्रेणेन्द्र इवासुरान्॥ १९॥
अन्तरिक्षस्थित: श्रीमानिदं वचनमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
महल को जलता हुआ देखकर वानरों के समान हनुमान्‌जी ने उसी खंभे से सैकड़ों राक्षसों को मार डाला, जैसे इन्द्र अपने वज्र से राक्षसों का संहार करते हैं और आकाश में खड़े होकर उस तेजस्वी योद्धा ने इस प्रकार कहा - ॥19 1/2॥
 
Seeing the palace burning, Hanuman, the monkey monkey, killed hundreds of demons with that very pillar, like Indra who slays the demons with his thunderbolt, and standing in the sky, that brilliant warrior said thus - ॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)