श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.42.8 
अथाब्रवीत् तदा साध्वी सीता सर्वाङ्गशोभना।
रक्षसां कामरूपाणां विज्ञाने का गतिर्मम॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तब सुन्दर एवं गुणवती सीता बोलीं - 'जो राक्षस इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर लेते हैं, उन्हें पहचानने या समझने का मेरे लिए क्या उपाय है?॥8॥
 
Then the beautiful and virtuous Sita said, 'What is the means for me to understand or recognise the demons who assume any form at will?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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