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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 5: सुन्दर काण्ड
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सर्ग 42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार
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श्लोक 31
श्लोक
5.42.31
स भूत्वा तु महाकायो हनूमान् मारुतात्मज:।
पुच्छमास्फोटयामास लङ्कां शब्देन पूरयन्॥ ३१॥
अनुवाद
पवनपुत्र हनुमान ने बहुत विशाल शरीर धारण कर लिया और अपनी पूंछ हिलाने लगे, जिससे लंका में ध्वनि गूंजने लगी।
Hanuman, the son of the wind, assumed a very huge body and began to beat his tail and make Lanka resonate with the sound of it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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