श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.42.25 
तेषामशीतिसाहस्रं किंकराणां तरस्विनाम्।
निर्ययुर्भवनात् तस्मात् कूटमुद‍्गरपाणय:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
राजा के आदेश पर अस्सी हजार तेज सेवक हाथों में कुल्हाड़ी और गदा लेकर महल से बाहर आये।
 
At the king's command eighty thousand swift servants came out of the palace carrying axes and maces in their hands.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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