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श्लोक 5.42.25  |
तेषामशीतिसाहस्रं किंकराणां तरस्विनाम्।
निर्ययुर्भवनात् तस्मात् कूटमुद्गरपाणय:॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| राजा के आदेश पर अस्सी हजार तेज सेवक हाथों में कुल्हाड़ी और गदा लेकर महल से बाहर आये। |
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| At the king's command eighty thousand swift servants came out of the palace carrying axes and maces in their hands. |
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