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श्लोक 5.42.19  |
चारुपल्लवपत्राढॺं यं सीता स्वयमास्थिता।
प्रवृद्ध: शिंशपावृक्ष: स च तेनाभिरक्षित:॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| ‘उसने सुन्दर पत्तों और पत्तियों से युक्त विशाल अशोक वृक्ष को सुरक्षित रखा है, जिसके नीचे सीता रहती हैं।॥19॥ |
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| ‘He has kept safely the huge Ashoka tree, filled with beautiful leaves and foliage, under which Sita lives.॥ 19॥ |
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