श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 42: राक्षसियों के मुख से एक वानर के द्वारा प्रमदावन के विध्वंस का समाचार सुनकर रावण का किंकर नामक राक्षसों को भेजना और हनुमान जी के द्वारा उन सबका संहार  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.42.15 
वासवस्य भवेद् दूतो दूतो वैश्रवणस्य वा।
प्रेषितो वापि रामेण सीतान्वेषणकाङ्क्षया॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘सम्भव है कि वह इन्द्र या कुबेर का दूत हो, अथवा स्वयं भगवान् राम ने उसे सीता की खोज करने के लिए भेजा हो।॥15॥
 
‘It is possible that he is a messenger of Indra or Kubera, or Lord Rama himself may have sent him to look for Sita.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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