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श्लोक 5.42.15  |
वासवस्य भवेद् दूतो दूतो वैश्रवणस्य वा।
प्रेषितो वापि रामेण सीतान्वेषणकाङ्क्षया॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| ‘सम्भव है कि वह इन्द्र या कुबेर का दूत हो, अथवा स्वयं भगवान् राम ने उसे सीता की खोज करने के लिए भेजा हो।॥15॥ |
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| ‘It is possible that he is a messenger of Indra or Kubera, or Lord Rama himself may have sent him to look for Sita.॥ 15॥ |
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