श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 41: हनुमान जी के द्वारा प्रमदावन (अशोक वाटिका)- का विध्वंस  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.41.10 
इदमस्य नृशंसस्य नन्दनोपममुत्तमम्।
वनं नेत्रमन:कान्तं नानाद्रुमलतायुतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इस क्रूर रावण का यह सुन्दर उद्यान नेत्रों को सुखदायक और अत्यन्त सुन्दर है। नाना प्रकार के वृक्षों और लताओं से आच्छादित होने के कारण यह नन्दनवन के समान सुन्दर प्रतीत होता है॥10॥
 
This beautiful garden of this ruthless Ravana is pleasing to the eyes and is very beautiful. Being covered with various kinds of trees and creepers, it appears as beautiful as Nandanavan.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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