श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 41: हनुमान जी के द्वारा प्रमदावन (अशोक वाटिका)- का विध्वंस  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.41.1 
स च वाग्भि: प्रशस्ताभिर्गमिष्यन् पूजितस्तया।
तस्माद् देशादपाक्रम्य चिन्तयामास वानर:॥ १॥
 
 
अनुवाद
जब वीर वानर हनुमान् सीताजी के द्वारा उत्तम वचनों से सम्मानित होकर उस स्थान से विदा हो रहे थे, तब वे उस स्थान से हटकर दूसरे स्थान पर चले गए और इस प्रकार सोचने लगे - ॥1॥
 
When the brave monkey Hanuman was leaving the place after being honoured by Sita with good words, he moved away from that place to another place and started thinking like this - ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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