श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.40.8 
एष निर्यातित: श्रीमान् मया ते वारिसम्भव:।
अत: परं न शक्ष्यामि जीवितुं शोकलालसा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
आज मैं समुद्र के जल से उत्पन्न यह चमकीला रत्न तुम्हें लौटा रहा हूँ। अब मैं शोक के कारण अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकूँगा ॥8॥
 
Today I am returning to you this lustrous gemstone which was produced from the waters of the sea. Now I will not be able to live for long due to grief. ॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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