श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.40.6 
स वीर्यवान् कथं सीतां हृतां समनुमन्यसे।
वसन्तीं रक्षसां मध्ये महेन्द्रवरुणोपम॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे महेन्द्र और वरुण के समान बलवान प्रियतम! इतने बलवान होकर भी आप मुझ सीता का अपमान कैसे सहन कर रहे हैं, जो हरण करके राक्षसों के घर में रह रही है?॥6॥
 
O my beloved, who is as powerful as Mahendra and Varuna! How do you, despite being so powerful, tolerate the humiliation of me, Sita, who was abducted and is living in the home of demons?॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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