श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.40.3 
यथा तं पुरुषव्याघ्रं गात्रै: शोकाभिकर्शितै:।
संस्पृशेयं सकामाहं तथा कुरु दयां मयि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मुझ पर ऐसी दया करो, कि मैं शोक से दुर्बल हुए अंगों से मनुष्यों में श्रेष्ठ श्री राम का प्रेमपूर्वक स्पर्श कर सकूँ॥3॥
 
Have such mercy on me, so that I can lovingly touch Shri Ram, the best of humans, with my limbs weakened by grief. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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