श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 40: सीता का श्रीराम से कहने के लिये पुनः संदेश देना तथा हनुमान जी का उन्हें आश्वासन दे उत्तर-दिशा की ओर जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.40.22 
हनूमन् सिंहसंकाशौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ।
सुग्रीवं च सहामात्यं सर्वान् ब्रूया अनामयम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हनुमान्! सिंह के समान पराक्रमी दोनों भाइयों श्री राम और लक्ष्मण को, मंत्रियों सहित सुग्रीव को तथा अन्य समस्त वानरों को मेरी ओर से नमस्कार है॥22॥
 
Hanuman! My best wishes to the two brothers, Shri Ram and Lakshmana, who are as mighty as lions, to Sugriva along with his ministers and all the other monkeys. 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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