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श्लोक 5.40.14  |
दृष्टा कथंचिद् भवती न काल: परिदेवितुम्।
इमं मुहूर्तं दु:खानामन्तं द्रक्ष्यसि भामिनि॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| अब जब मैंने किसी प्रकार तुम्हारा दर्शन कर लिया है, तो रोने या शोक करने का समय नहीं है। हे भामिनि! तुम इसी क्षण अपने समस्त दुःखों का अंत देख लोगी॥14॥ |
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| ‘Now that I have somehow seen you, there is no time for crying or mourning. Bhaamini! You will see the end of all your sorrows in this very moment.॥ 14॥ |
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