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श्लोक 5.4.30  |
स हेमजाम्बूनदचक्रवालं
महार्हमुक्तामणि भूषितान्तम्।
परार्घ्यकालागुरुचन्दनार्हं
स रावणान्त:पुरमाविवेश॥ ३०॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् हनुमान जी ने रावण के उस अन्तःकक्ष में प्रवेश किया जिसके चारों ओर सोने और जामुन की दीवार थी, जिसका ऊपरी भाग बहुमूल्य मोतियों और रत्नों से सुशोभित था तथा जो उत्तम काले अगुरु और चन्दन से पूजित था॥30॥ |
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| Thereafter, Hanuman ji entered the inner chamber of Ravana which had a wall of gold and jambuna around it, the upper part of which was decorated with precious pearls and gems and which was worshiped with the best black aguru and sandalwood. 30॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डे चतुर्थ: सर्ग:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें चौथा सर्ग पूरा हुआ॥ ४॥ |
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