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ramayan 5.4.3: वानरराज सुग्रीव का उपकार करने वाले हनुमान जी ने लंका में इस प्रकार प्रवेश किया, मानो उन्होंने शत्रुओं के सिर पर अपना बायां पैर रख दिया हो।   |   ramayan सर्ग 5.4: हनुमान जी का लंकापुरी एवं रावण के अन्तःपुर में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 4: हनुमान जी का लंकापुरी एवं रावण के अन्तःपुर में प्रवेश  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.4.3 
प्रविश्य नगरीं लंकां कपिराजहितंकर:।
चक्रेऽथ पादं सव्यं च शत्रूणां स तु मूर्धनि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वानरराज सुग्रीव का उपकार करने वाले हनुमान जी ने लंका में इस प्रकार प्रवेश किया, मानो उन्होंने शत्रुओं के सिर पर अपना बायां पैर रख दिया हो।
 
Hanuman, who did good to the king of monkeys Sugreeva, entered Lanka in this manner, as if he had placed his left foot on the heads of the enemies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)