श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 4: हनुमान जी का लंकापुरी एवं रावण के अन्तःपुर में प्रवेश  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.4.22 
स्रग्विणस्त्वनुलिप्तांश्च वराभरणभूषितान्।
नानावेषसमायुक्तान् यथास्वैरचरान् बहून्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
किसी के गले में पुष्पमालाएँ थीं, किसी के माथे आदि अंग चंदन से सजे हुए थे, किसी के शरीर पर सुन्दर आभूषण थे, किसी ने नाना प्रकार के वस्त्र पहने हुए थे, किसी ने अपनी इच्छानुसार विहार किया हुआ था।
 
Some had garlands of flowers around their necks and their foreheads and other parts were decorated with sandalwood. Some were adorned with fine ornaments. Many were dressed in various types of attire and many seemed to be roaming around as per their own will.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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