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ramayan 5.4.18: कुछ के हाथों में धनुष, तलवार, कुल्हाड़ी और मूसल जैसे हथियार थे। कुछ के हाथों में उत्कृष्ट तलवारें थीं और कुछ विचित्र कवचों से चमक रहे थे।   |   ramayan सर्ग 5.4: हनुमान जी का लंकापुरी एवं रावण के अन्तःपुर में प्रवेश   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 4: हनुमान जी का लंकापुरी एवं रावण के अन्तःपुर में प्रवेश  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.4.18 
धन्विन: खड‍‍्गिनश्चैव शतघ्नीमुसलायुधान्।
परिघोत्तमहस्तांश्च विचित्रकवचोज्ज्वलान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
कुछ के हाथों में धनुष, तलवार, कुल्हाड़ी और मूसल जैसे हथियार थे। कुछ के हाथों में उत्कृष्ट तलवारें थीं और कुछ विचित्र कवचों से चमक रहे थे।
 
Some had weapons like bows, swords, axes and pestles. Some had excellent swords in their hands and some were shining with strange armours.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)