श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 4: हनुमान जी का लंकापुरी एवं रावण के अन्तःपुर में प्रवेश  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.4.13 
शुश्राव जपतां तत्र मन्त्रान् रक्षोगृहेषु वै।
स्वाध्यायनिरतांश्चैव यातुधानान् ददर्श स:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
राक्षसों के घरों में उन्होंने बहुत से लोगों को मंत्र जपते सुना और बहुत से निशाचर प्राणियों को अध्ययन में लगे देखा ॥13॥
 
In the houses of demons he heard many people chanting mantras and saw many night creatures engaged in study.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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