श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.39.9 
यथा च स महाबाहुर्मां तारयति राघव:।
अस्माद् दु:खाम्बुसंरोधात् त्वं समाधातुमर्हसि॥ ९॥
 
 
अनुवाद
'जिस प्रकार महाबाहु श्री रघुनाथजी ने मुझे इस दुःखसागर से छुड़ाया है, उसी प्रकार तुम भी प्रयत्न करो।
 
‘Just as the mighty-armed Sri Raghunathji rescued me from this ocean of sorrow, you should make the same efforts.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd