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श्लोक 5.39.6-7h  |
ज्ञात्वा सम्प्रस्थितं देवी वानरं पवनात्मजम्॥ ६॥
बाष्पगद्गदया वाचा मैथिली वाक्यमब्रवीत्। |
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| अनुवाद |
| यह जानकर कि वीर वानर पवनपुत्र हनुमान् वहाँ से लौटने को तत्पर हैं, मिथिलेशकुमारी का गला रुँध गया और वे अश्रुपूर्ण शब्दों में बोलीं-॥6 1/2॥ |
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| Knowing that the brave monkey Hanuman, son of the wind, was ready to return from there, Mithilesh Kumari's throat became choked and she spoke in tearful words -॥ 6 1/2॥ |
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