श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  5.39.6-7h 
ज्ञात्वा सम्प्रस्थितं देवी वानरं पवनात्मजम्॥ ६॥
बाष्पगद‍्गदया वाचा मैथिली वाक्यमब्रवीत्।
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि वीर वानर पवनपुत्र हनुमान् वहाँ से लौटने को तत्पर हैं, मिथिलेशकुमारी का गला रुँध गया और वे अश्रुपूर्ण शब्दों में बोलीं-॥6 1/2॥
 
Knowing that the brave monkey Hanuman, son of the wind, was ready to return from there, Mithilesh Kumari's throat became choked and she spoke in tearful words -॥ 6 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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