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श्लोक 5.39.53  |
रामाद् विशिष्ट: कोऽन्योऽस्ति कश्चित् सौमित्रिणा सम:।
अग्निमारुतकल्पौ तौ भ्रातरौ तव संश्रयौ॥ ५३॥ |
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| अनुवाद |
| श्री राम से बढ़कर कौन है ? और लक्ष्मण के समान कौन है ? अग्नि और वायु के समान तेजस्वी वे दोनों भाई आपके शरणस्थल हैं (आप चिन्ता न करें)॥ 53॥ |
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| Who is greater than Shri Rama? And who can be equal to Lakshmana? Those two brothers, as radiant as the fire and the wind, are your refuge (you need not worry).॥ 53॥ |
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