श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.39.52 
रुद मा देवि शोकेन मा भूत् ते मनसो भयम्।
शचीव भर्त्रा शक्रेण सङ्गमेष्यसि शोभने॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
'देवी! शोक से मत रोओ। तुम्हारे मन का भय दूर हो। सुन्दरी! जिस प्रकार शची देवराज इन्द्र से मिलती है, उसी प्रकार तुम अपने पति से मिलोगी। 52।
 
‘Devi! Do not cry in grief. May the fear in your mind be dispelled. Beautiful! Just as Sachi meets Devraj Indra, in the same way you will meet your husband. 52.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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