श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.39.47 
एवमाश्वास्य वैदेहीं हनूमान् मारुतात्मज:।
गमनाय मतिं कृत्वा वैदेहीं पुनरब्रवीत्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
विदेहनन्दिनी सीता को यह आश्वासन देकर पवनपुत्र हनुमान् वहाँ से लौटने का विचार करके उनसे पुनः बोले-॥47॥
 
Having given this assurance to Videhanandini Sita, Hanuman, the son of the wind, decided to return from there and said to her again -॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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