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श्लोक 5.39.46  |
क्षिप्रं त्वं देवि शोकस्य पारं द्रक्ष्यसि मैथिलि।
रावणं चैव रामेण द्रक्ष्यसे निहतं बलात्॥ ४६॥ |
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| अनुवाद |
| ‘देवि! मिथिलेशकुमारी! तुम शीघ्र ही अपने शोक का अंत देखोगे। तुम यह भी देखोगे कि श्री रामचंद्रजी ने रावण को बलपूर्वक मार डाला है।’॥ 46॥ |
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| ‘Devi! Mithilesh Kumari! You will soon see an end to your grief. You will also see that Shri Ramchandraji has killed Ravana forcefully.’॥ 46॥ |
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