श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  5.39.46 
क्षिप्रं त्वं देवि शोकस्य पारं द्रक्ष्यसि मैथिलि।
रावणं चैव रामेण द्रक्ष्यसे निहतं बलात्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
‘देवि! मिथिलेशकुमारी! तुम शीघ्र ही अपने शोक का अंत देखोगे। तुम यह भी देखोगे कि श्री रामचंद्रजी ने रावण को बलपूर्वक मार डाला है।’॥ 46॥
 
‘Devi! Mithilesh Kumari! You will soon see an end to your grief. You will also see that Shri Ramchandraji has killed Ravana forcefully.’॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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