श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.39.45 
निहते राक्षसेन्द्रे च सपुत्रामात्यबान्धवे।
त्वं समेष्यसि रामेण शशाङ्केनेव रोहिणी॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज रावण के अपने पुत्र, मंत्री और सम्बन्धियों सहित मारे जाने पर तुम श्री रामचन्द्रजी से उसी प्रकार मिलोगे जैसे रोहिणी चन्द्रमा से मिलती है॥45॥
 
After the demon king Ravana is killed along with his son, minister and relatives, you will meet Shri Ramchandraji in the same way as Rohini meets the moon. 45॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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