श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.39.40 
तदलं परितापेन देवि शोको व्यपैतु ते।
एकोत्पातेन ते लङ्कामेष्यन्ति हरियूथपा:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
अतः देवी! आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। आपका दुःख दूर हो जाना चाहिए। वानरयुथपति एक ही छलांग में लंका पहुँच जाएँगे। 40॥
 
So Devi! You don't need to worry. Your grief should go away. Vanarayuthapathi will reach Lanka in one jump. 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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