श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.39.36 
येषां नोपरि नाधस्तान्न तिर्यक् सज्जते गति:।
न च कर्मसु सीदन्ति महत्स्वमिततेजस:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
जिनकी गति कहीं भी, ऊपर-नीचे या इधर-उधर नहीं रुकती। वे बड़े-से-बड़े कार्य में भी साहस नहीं छोड़ते। वे महान तेजवान हैं॥ 36॥
 
‘Those whose movements never stop anywhere, up or down or here and there. They never lose courage even when faced with the biggest of tasks. They have great brilliance.॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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