श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  5.39.33 
देवि हर्यृक्षसैन्यानामीश्वर: प्लवतां वर:।
सुग्रीव: सत्यसम्पन्नस्तवार्थे कृतनिश्चय:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
'देवि! वानरों में श्रेष्ठ तथा वानर-भालुओं की सेना के स्वामी सुग्रीव सत्यवादी हैं। उन्होंने आपको बचाने का दृढ़ निश्चय कर लिया है॥ 33॥
 
‘Devi! Sugreeva, the best of the apes and the lord of the army of monkeys and bears, is truthful. He has firmly decided to rescue you.॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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