श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  5.39.31 
तद्यथा तस्य विक्रान्तमनुरूपं महात्मन:।
भवेदाहवशूरस्य तथा त्वमुपपादय॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम ऐसे उपाय करो जिससे वीर महात्मा श्री राम का पराक्रम उनके पराक्रम के अनुरूप प्रकट हो सके। ॥31॥
 
"Therefore you should take such measures by which the might of the brave Mahatma Shri Ram may be displayed as per his might." ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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