श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.39.28 
काममस्य त्वमेवैक: कार्यस्य परिसाधने।
पर्याप्त: परवीरघ्न यशस्यस्ते फलोदय:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुवीरों का नाश करने वाले पवनपुत्र! इसमें संदेह नहीं कि आप ही मेरे उद्धार का कार्य करने में समर्थ हैं; परंतु ऐसा करने से जो विजय फल प्राप्त होगा, उसका यश केवल आपको ही मिलेगा, प्रभु श्री राम को नहीं॥ 28॥
 
O son of Pawan, destroyer of enemy warriors! There is no doubt that you alone are capable of accomplishing the task of my salvation; but the fruit of victory that will be achieved by doing so will be the glory of it only for you, not Lord Shri Ram.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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