श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.39.27 
तदस्मिन् कार्यनिर्योगे वीरैवं दुरतिक्रमे।
किं पश्यसे समाधानं त्वं हि कार्यविदां वर:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! इस प्रकार समुद्र पार करने का यह कार्य अत्यन्त कठिन हो गया है। ऐसी स्थिति में इस कार्य को करने का तुम्हें क्या उपाय सूझता है? यह मुझे बताओ; क्योंकि इस कार्य को करने का उपाय जानने वालों में तुम श्रेष्ठ हो॥ 27॥
 
‘Valiant! In this way, it has become very difficult to carry out this task of crossing the ocean. In such a situation, what method do you see to accomplish the task? Tell me this; because you are the best among those who know the method to accomplish the task.॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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