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श्लोक 5.39.27  |
तदस्मिन् कार्यनिर्योगे वीरैवं दुरतिक्रमे।
किं पश्यसे समाधानं त्वं हि कार्यविदां वर:॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| हे वीर! इस प्रकार समुद्र पार करने का यह कार्य अत्यन्त कठिन हो गया है। ऐसी स्थिति में इस कार्य को करने का तुम्हें क्या उपाय सूझता है? यह मुझे बताओ; क्योंकि इस कार्य को करने का उपाय जानने वालों में तुम श्रेष्ठ हो॥ 27॥ |
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| ‘Valiant! In this way, it has become very difficult to carry out this task of crossing the ocean. In such a situation, what method do you see to accomplish the task? Tell me this; because you are the best among those who know the method to accomplish the task.॥ 27॥ |
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