श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.39.26 
त्रयाणामेव भूतानां सागरस्येह लङ्घने।
शक्ति: स्याद् वैनतेयस्य तव वा मारुतस्य वा॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में समुद्र को पार करने की शक्ति केवल तीन प्राणियों में ही देखी गई है। आपमें, गरुड़ में या वायुदेव में ॥26॥
 
In this world, the power to cross the ocean has been seen only in three creatures. In you, in Garuda or in the wind god. 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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