श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.39.22 
ततो हि हरिशार्दूल पुनरागमनाय तु।
प्राणानामपि संदेहो मम स्यान्नात्र संशय:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
हे वानरश्रेष्ठ! यहाँ से विश्राम करके यात्रा करने के पश्चात् यदि आपके लौटने में कुछ भी संदेह या विलम्ब हुआ तो मेरे प्राण भी संकट में पड़ जाएँगे, इसमें कोई संदेह नहीं है॥22॥
 
O great monkey! After resting and travelling from here, if there is any doubt or delay in your return then my life will also be in danger, there is no doubt about it. ॥ 22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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