श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.39.21 
मम चैवाल्पभाग्याया: सांनिध्यात् तव वानर।
अस्य शोकस्य महतो मुहूर्तं मोक्षणं भवेत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वनवीर! आपके समीप रहने से मेरी बेचारी पत्नी का महान् दुःख कुछ समय के लिए दूर हो जाएगा। 21॥
 
Vanveer! Staying close to you will relieve the great sorrow of my poor wife for a while. 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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