श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.39.20 
यदि वा मन्यसे वीर वसैकाहमरिंदम।
कस्मिंश्चित् संवृते देशे विश्रान्त: श्वो गमिष्यसि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का दमन करने वाले वीर! यदि आप उचित समझें तो एक दिन यहाँ किसी गुप्त स्थान पर ठहरें। एक दिन विश्राम करके कल प्रस्थान करें॥ 20॥
 
O brave one who has suppressed the enemies! If you deem it fit, then stay here in some secret place for a day. After resting for a day, leave tomorrow.॥ 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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