श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.39.17 
स हि सागरपर्यन्तां महीं साधितुमर्हति।
त्वन्निमित्तो हि रामस्य जयो जनकनन्दिनि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
वे समुद्रपर्यन्त सम्पूर्ण पृथ्वी को जीतने में समर्थ हैं। हे जनकननदिनि! श्री रामचन्द्रजी तुम्हारे लिए युद्ध करते हुए अवश्य विजयी होंगे।॥17॥
 
‘He is capable of conquering the entire earth up to the sea. O Janakanandini! Shri Ramchandraji will definitely be victorious while fighting for you.'॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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