श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.39.15 
नहि पश्यामि मर्त्येषु नासुरेषु सुरेषु वा।
यस्तस्य वमतो बाणान् स्थातुमुत्सहतेऽग्रत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मैं मनुष्यों, राक्षसों या देवताओं में से किसी को भी ऐसा नहीं देखता जो बाणों की वर्षा करते हुए भगवान राम के सामने खड़ा हो सके॥15॥
 
I do not see anyone, even among humans, demons or gods, who can stand before Lord Rama while showering arrows.॥ 15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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