श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.39.12 
मत्संदेशयुता वाचस्त्वत्त: श्रुत्वैव राघव:।
पराक्रमे मतिं वीरो विधिवत् संविधास्यति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
आपसे मेरा संदेश सुनकर ही वीर रघुनाथ अपना मन वीरतापूर्ण कार्य करने में लगाएंगे।॥12॥
 
Only after hearing the words containing my message from you will the valiant Raghunatha devote his mind to performing heroic deeds.'॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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