श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.39.11 
नित्यमुत्साहयुक्तस्य वाच: श्रुत्वा मयेरिता:।
वर्धिष्यते दाशरथे: पौरुषं मदवाप्तये॥ ११॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि दशरथपुत्र भगवान राम सदैव उत्साह से भरे रहते हैं, तथापि मेरी बात सुनकर मुझे प्राप्त करने के लिए उनकी चेष्टाएँ और भी बढ़ जाएँगी ॥ 11॥
 
Although Lord Rama, the son of Dasharatha, is always full of enthusiasm, yet after hearing what I have to say, his efforts to attain me will increase even more. ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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