श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.39.10 
जीवन्तीं मां यथा राम: सम्भावयति कीर्तिमान्।
तत् त्वया हनुमन् वाच्यं वाचा धर्ममवाप्नुहि॥ १०॥
 
 
अनुवाद
हनुमान्! जैसे मेरे जीवित रहते हुए श्री रघुनाथजी यहाँ आकर मुझसे मिलते हैं, वैसे ही तुम भी उनसे ऐसी ही बातें कहो और ऐसा करके अपने वचनों द्वारा धर्माचरण का फल प्राप्त करो॥10॥
 
Hanuman! Just as the illustrious Raghunathji comes here while I am alive and meets me, you should say the same things to him and by doing so, obtain the fruits of righteous conduct through your words.॥10॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd