श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 39: समद्र-तरण के विषय में शङ्कित हुई सीता को वानरों का पराक्रम बताकर हनुमान जी का आश्वासन देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.39.1 
मणिं दत्त्वा तत: सीता हनूमन्तमथाब्रवीत्।
अभिज्ञानमभिज्ञातमेतद् रामस्य तत्त्वत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
मणि देने के बाद सीता ने हनुमान से कहा- 'प्रभु श्री रामचन्द्रजी मेरे इस चिह्न को अच्छी तरह पहचानते हैं।'॥1॥
 
After giving the gem, Sita said to Hanuman - 'Lord Shri Ramchandraji recognizes this mark of mine very well.' 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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