श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  5.38.70 
मणिवरमुपगृह्य तं महार्हं
जनकनृपात्मजया धृतं प्रभावात्।
गिरिवरपवनावधूतमुक्त:
सुखितमना: प्रतिसंक्रमं प्रपेदे॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
राजा जनक की पुत्री सीता ने जिस अमूल्य मणि को छिपाकर अपने विशेष प्रभाव से धारण किया था, उसे लेकर हनुमान जी हृदय में ऐसे प्रसन्न और संतुष्ट हो गए, जैसे कोई मनुष्य किसी विशाल पर्वत की चोटी से उठने वाली प्रचण्ड वायु के वेग से विचलित होकर उसके प्रभाव से मुक्त हो जाता है। तत्पश्चात् वे वहाँ से लौटने के लिए तैयार हुए। 70.
 
Hanuman ji, having taken the precious gem which Sita, daughter of King Janaka, had hidden and worn with her special influence, became happy and content in his heart like a man who has been shaken by the force of a strong wind rising from the top of a great mountain and then freed from its influence. Thereafter he prepared to return from there. 70.
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये सुन्दरकाण्डेऽष्टात्रिंश: सर्ग:॥ ३८॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके सुन्दरकाण्डमें अड़तीसवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ३८॥
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)