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ramayan 5.38.64-65h: 'आप मेरे स्वामी, वीर प्रभु श्री राम से बार-बार कहें कि मैं तब तक जीवित रहूँगा जब तक मेरे जीवन के लिए निर्धारित महीने शेष हैं। शेष दो महीनों के बाद मैं जीवित नहीं रह सकता। मैं आपसे सत्य की शपथ लेकर यह कह रहा हूँ।'   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 64-65h
 
 
श्लोक  5.38.64-65h 
इदं ब्रूयाश्च मे नाथं शूरं रामं पुन: पुन:।
जीवितं धारयिष्यामि मासं दशरथात्मज॥ ६४॥
ऊर्ध्वं मासान्न जीवेयं सत्येनाहं ब्रवीमि ते।
 
 
अनुवाद
'आप मेरे स्वामी, वीर प्रभु श्री राम से बार-बार कहें कि मैं तब तक जीवित रहूँगा जब तक मेरे जीवन के लिए निर्धारित महीने शेष हैं। शेष दो महीनों के बाद मैं जीवित नहीं रह सकता। मैं आपसे सत्य की शपथ लेकर यह कह रहा हूँ।'
 
‘You must repeatedly tell my master, the valiant Lord Shri Ram, that I will live for as long as the months that are fixed for my life are left. I cannot survive after the remaining two months. I am telling you this by swearing on the truth. 64 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)