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ramayan 5.38.53-54h: हनुमान के ऐसा कहने पर देवी सीता ने कहा - 'हे वानरश्रेष्ठ! मेरी ओर से सिर झुकाकर उन श्री रघुनाथजी को प्रणाम करो, जो बुद्धिमान् कौशल्यादेवी के गर्भ से उत्पन्न हुए हैं और जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं, और उनका कुशलक्षेम पूछो।॥ 53 1/2॥   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 53-54h
 
 
श्लोक  5.38.53-54h 
इत्युक्तवति तस्मिंश्च सीता पुनरथाब्रवीत्।
कौसल्या लोकभर्तारं सुषुवे यं मनस्विनी॥ ५३॥
तं ममार्थे सुखं पृच्छ शिरसा चाभिवादय।
 
 
अनुवाद
हनुमान के ऐसा कहने पर देवी सीता ने कहा - 'हे वानरश्रेष्ठ! मेरी ओर से सिर झुकाकर उन श्री रघुनाथजी को प्रणाम करो, जो बुद्धिमान् कौशल्यादेवी के गर्भ से उत्पन्न हुए हैं और जो सम्पूर्ण जगत के स्वामी हैं, और उनका कुशलक्षेम पूछो।॥ 53 1/2॥
 
Upon Hanuman saying this, Goddess Sita then said - 'O best of the monkeys! Bow your head on my behalf and offer your respects to Shri Raghunath, who was born to the intelligent Kausalya Devi and who is the Lord of the whole universe, and ask about his well-being.॥ 53 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)