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श्लोक 5.38.52  |
ब्रूहि यद् राघवो वाच्यो लक्ष्मणश्च महाबल:।
सुग्रीवो वापि तेजस्वी हरयो वा समागता:॥ ५२॥ |
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| अनुवाद |
| अब तुम्हें जो कुछ कहना हो, वह भगवान् राम, पराक्रमी लक्ष्मण, यशस्वी सुग्रीव और वहाँ एकत्रित हुए वानरों से कहो।॥52॥ |
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| Now say whatever you have to say to Lord Rama, the mighty Lakshmana, the illustrious Sugreeva and the monkeys gathered there.'॥ 52॥ |
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