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ramayan 5.38.49: किसी तरह मैंने तुम्हें देख लिया। अब शोक करने का समय नहीं है। शोभने! इसी क्षण से तुम्हें अपने दुःखों का अंत दिखाई देगा।   |   ramayan सर्ग 5.38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना   ।   ramayan काण्ड 5: सुन्दर काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.38.49 
कथंचिद् भवती दृष्टा न काल: परिशोचितुम्।
इमं मुहूर्तं दु:खानामन्तं द्रक्ष्यसि शोभने॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
किसी तरह मैंने तुम्हें देख लिया। अब शोक करने का समय नहीं है। शोभने! इसी क्षण से तुम्हें अपने दुःखों का अंत दिखाई देगा।
 
Somehow I have seen you. Now there is no time to mourn. Shobhane! From this moment onwards you will see the end of your sorrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)