श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 5: सुन्दर काण्ड  »  सर्ग 38: सीताजी का हनुमान जी को पहचान के रूप में चित्रकट पर्वत पर घटित हए एक कौए के प्रसंग को सुनाना, श्रीराम को शीघ्र बुलाने के लिये अनुरोध करना और चूड़ामणि देना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  5.38.47 
वैदेह्या वचनं श्रुत्वा करुणं साश्रु भाषितम्।
अथाब्रवीन्महातेजा हनूमान् हरियूथप:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
जब विदेहपुत्री सीता ने आँसू बहाते हुए ये करुणापूर्ण वचन कहे, तब वानरराज महाबली हनुमान्‌ ने उन्हें सुनकर इस प्रकार कहा॥47॥
 
When Sita, the daughter of Videha, said these compassionate words while shedding tears, then the mighty Hanuman, the king of the monkey clan, heard them and spoke thus:॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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